पपीता कि खेती कैसे करे । पपीता की उन्नत किस्मे 2022  पपीता का उपयोग पेय पदार्थ, फल के रुप मे ,जैम,  आइसक्रीम  ओर बीज भी औषधीय गुणों के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

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पपीता का पौधे के लिये उष्णकटिबंधीय जलवायु होना आवश्यक है यानि जहा तापमान 10-26 डिग्री सेल्सियस तक रहता है तथा पाले की संभावना न हो

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 पपीता की नर्सरी कैसे तैयार करें एक हेक्टेयर के लिए 500 ग्राम बीज की मात्रा आवश्यक होती है, बीज बोने के लिए ख़ास तौर पर जमीन तैयार करनी चाहिए । 

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पपीता कि खेती के लिये खेत की तैयारी के लिये हल से जमीन को अच्छी तरह जुताई कर ले तथा पाटा से जमीन को समतल जरुर करे ।

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  पपीते की किस्में :- सूर्या, कुर्ग हनी ड्यू, वाशिंगटन, मधुबिन्दु, को 1, एवं 3 , रेड लेडी -786, ताइवान, पूसा डिलीशियस ,पूसा जाइंट , पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा आदि है । 

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 पौधा लगाने के तुरन्त बाद सिंचाई करें ध्यान रहे पौधे के तने के पास पानी न भरने पाए। गर्मियों में 5-7 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।

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 रोग एवं कीट निवारण आर्द्रगलन रोग - पौधे का तना जमीन के पास से सड़ जाता है और पौधा मुरझाकर गिर जाता है। इसका प्रभाव नये अंकुरित पौधों पर होता है। 

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 फलों का रंग गहरा हरे रंग से बदलकर हल्‍का पीला होने लगता है और फलों पर नाखून लगने से दूध की जगह पानी और तरल निकलता हो तो समझना चाहिए कि फल पक गया है ।

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 फलों का रंग गहरा हरे रंग से बदलकर हल्‍का पीला होने लगता है और फलों पर नाखून लगने से दूध की जगह पानी और तरल निकलता हो तो समझना चाहिए कि फल पक गया है ।

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